चुनौतियां

सनातन संरक्षण समिति की मुख्य चुनौतियां

आज सनातन समाज को अनेक चुनौतियां ललकार रही है। उनमें से कुछ विशेष इस प्रकार है-

  1. ⁠एक दोष पूर्ण तथा संक्रमित प्रजातंत्र-
    भारत में जनसंख्या का विस्फोट एक सामान्य समाचार है। पर इस निरंतर बढ़ती जनसंख्या में धर्म आधारित जनसंख्या का असंतुलन एक अत्यंत चिंता का विषय है।
    1950 से 2011 तक देश में मुस्लिम जनसंख्या में लगभग 43.15% की वृद्धि हुई, जब कि इसी अवधि में हिंदू जनसंख्या 7.82% कम हुई। दूसरे शब्दों में मुस्लिम जनसंख्या 9.8% से 14.2% हुई जबकि हिंदू जनसंख्या 84.7% से 79.8% पर पहुंच गई।
    हालांकि यह जनसंख्या अनुपात अधिक चिंताजनक प्रतीत नहीं होता, पर यदि चुनावी परिपेक्ष में इसके क्षेत्रीय प्रभाव का अध्ययन करें तो निकट भविष्य में हिंदू समाज के लिए यह एक विकराल आपत्ती का रूप ले सकता है।
    उदाहरणतः 2024 में लोक सभा के चुनावी आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 101 ऐसे लोकसभा चुनावी क्षेत्र थे जहां मुस्लिम जनसंख्या 20% से अधिक थी। मुस्लिम जनसंख्या की अनुपातहीन वृद्धि के कारण 2050 तक लगभग 170 से 180 ऐसे लोकसभा क्षेत्र होंगे जहां मुस्लिम जनसंख्या 20% से अधिक होगी। ऐसे क्षेत्रों में एक मुस्लिम प्रत्याशी या मुस्लिम समर्थन पर निर्भर करने वाला प्रत्याशी ही चुनाव जीत सकेगा।
    हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा, एक कथाकथित हिंदू पार्टी को मात्र 36- 37% वोट ही प्राप्त हुए । केवल 242 सीटों पर ही सिमट कर रह गई तथा बहुमत तक भी न पहुंच पाई। ऐसी स्थिति में 2050 के बाद केवल एक इस्लामी पार्टी या मुस्लिम समर्थन पर आधारित पार्टी की ही सत्ता में आने की संभावना होगी। ऐसे में समाज तथा संविधान में मुस्लिम प्रभाव अति शक्तिशाली हो जाएगा तथा सनातन की विचारधारा का पतन निश्चित ही होगा। इसमें यदि धर्म परिवर्तन, घुसपैठ तथा लव जिहाद आदि का योगदान भी जोड़ दें तो यह समस्या और भी विकराल रूप धारण कर लेती है। केवल 20-25 वर्ष ही रह गए हैं।
    केवल एक “सदृढ़ सनातन संगठन” ही इस चुनौती का सामना कर सकता है।

कश्मीरी हिंदू माइग्रेंट्स

kashmiri hindu migrants
kashmiri hindu migrants (1)

बढ़ती जनसंख्या के कारण मस्जिदों में जगह की कमी

muslims praying at street
muslims praying on street

विश्व में लुप्त होता हिंदू धर्म

kashmiri pandits
19 जनवरी 1990 को लगभग सभी कश्मीरी हिंदुओं को अपनी जन्मभूमि कश्मीर छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा।
afghanistan hindus
हिंदू शाही राजवंश का शासन 10वीं शताब्दी तक रहा
hindus in pakistan
पाकिस्तान – विभाजन के समय लगभग 15% हिंदू थे, जो 1951 तक घटकर लगभग 1.6% रह गए।
hindus in bangladesh (1)
बांग्लादेश – 1941 में लगभग 28% हिंदू थे, जो आज घटकर लगभग 8% रह गए हैं।
hindus in sri lanka
श्रीलंका – 1948
hindus in burma (myanmar)
बर्मा (म्यांमार) – 1937
hindus in nepal
नेपाल – 1768
hindus in tibet
तिब्बत – 1950
hindus in bhutan
भूटान – 1865
hindus in combodia
कंबोडिया – 14वीं शताब्दी में हिंदू धर्म का प्रभाव समाप्त हो गया।
hindus in thailand
थाईलैंड – 13वीं–14वीं शताब्दी में शांतिपूर्वक थेरवाद बौद्ध धर्म को अपनाया गया, जिससे हिंदू धर्म का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो गया।
hindu culture in vietnam
वियतनाम – 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच चंपा हिंदू साम्राज्य की पराजय और बाद में इस्लाम के प्रसार के कारण हिंदू धर्म का प्रभाव समाप्त हो गया।
hindus in afghanistan
अफ़गानिस्तान – 10वीं–11वीं शताब्दी में हिंदू धर्म का पतन शुरू हुआ, जो बाद में लगभग समाप्त हो गया।
hindus in philippines (1)
फ़िलीपींस – 11वीं–15वीं शताब्दी में हिंदू धर्म का प्रभाव कम हुआ और 16वीं शताब्दी में लगभग समाप्त हो गया।
hindus in indonesia
इंडोनेशिया – 14वीं शताब्दी से हिंदू धर्म का प्रभाव कम होना शुरू हुआ।

भारत के बाहर आज ऐसे कई देश हैं जहाँ अतीत में हिंदू धर्म, भारतीय संस्कृति या हिंदू-बौद्ध परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। समय के साथ राजनीतिक परिवर्तन, धार्मिक बदलाव, व्यापारिक संपर्क, आक्रमणों और औपनिवेशिक शासन जैसी ऐतिहासिक प्रक्रियाओं के कारण इन क्षेत्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक संरचना में परिवर्तन आया।

दक्षिण-पूर्व एशिया

इंडोनेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में विभिन्न कालखंडों में हिंदू-बौद्ध राज्यों का प्रभाव रहा। अंगकोर वाट, बाली की परंपराएँ तथा रामायण और महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक तत्व आज भी इन देशों की विरासत का हिस्सा हैं, यद्यपि वर्तमान में अधिकांश देशों में अन्य धर्म प्रमुख हैं।

मध्य एवं दक्षिण एशिया

पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार के अनेक क्षेत्रों में प्राचीन काल में हिंदू परंपराओं, मंदिरों और राजवंशों का प्रभाव था। समय के साथ विभिन्न राजनीतिक परिवर्तनों, आक्रमणों और सामाजिक-धार्मिक बदलावों के कारण इन क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय और धार्मिक संरचना में परिवर्तन हुआ।

अन्य क्षेत्र

श्रीलंका में प्राचीन काल से हिंदू परंपरा विद्यमान रही है और आज भी वहाँ हिंदू समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए है। वहीं फिजी, मॉरीशस, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, गुयाना और सूरीनाम जैसे देशों में भारतीय मूल के लोगों के प्रवास के कारण हिंदू धर्म आज भी जीवंत रूप से प्रचलित है।

ऐतिहासिक परिवर्तन के प्रमुख कारण
  • व्यापार और समुद्री संपर्कों के माध्यम से नए धर्मों का प्रसार।
  • राजनीतिक परिवर्तन और विभिन्न साम्राज्यों का उदय एवं पतन।
  • बौद्ध धर्म तथा अन्य धार्मिक परंपराओं का विस्तार।
  • औपनिवेशिक शासन और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव।
  • जनसंख्या के प्रवास और समय के साथ हुए सामाजिक परिवर्तन।

आज भी अनेक देशों में रामायण, महाभारत, हिंदू देवताओं, मंदिर स्थापत्य और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।