हमारी कहानी
सनातन संरक्षण समिति की स्थापना एवं ऐतिहासिक यात्रा
सनातन संरक्षण समिति
सनातन संरक्षण समिति का गठन तिथि षष्ठी, शुक्ल पक्ष, पौष माह, संवत् २०८१ (26 दिसंबर, 2025) को पवित्र नगरी हरिद्वार में हुआ।
इसके मुख्य नायक जगतगुरु शंकराचार्य, स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी हैं, जिनके दिव्य मार्गदर्शन में यह ऐतिहासिक संगठन अस्तित्व में आया।
यह समिति सनातन धर्म के प्रमुख मंदिरों, तीर्थ स्थलों एवं सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा एवं संवर्धन हेतु समर्पित है।
सनातन संरक्षण समिति की प्रथम बैठक माघ कृष्ण चतुर्दशी, संवत् २०८२ (17 जनवरी 2026) को पवित्र तीर्थराज प्रयागराज में सम्पन्न हुई। इस बैठक में समिति के सदस्यों द्वारा सनातन धर्म के संरक्षण एवं मंदिरों की व्यवस्था से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
ऐतिहासिक घटनाक्रम
परमधर्मसंसद — धर्मादेश पारित
कुंभ नगरी में देश की मान्य सनातनी संस्थाओं के प्रमुखों की उपस्थिति में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने अपनी परमधर्मसंसद में विस्तृत चर्चा के पश्चात् सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक धर्मादेश पारित किया —
“प्रसिद्ध मंदिरों एवं धर्म स्थलों की गरिमा एवं रक्षा के लिए देश की मान्य सनातनी संस्थाओं के प्रमुखों के नेतृत्व में एक सनातन संरक्षण परिषद (सनातन बोर्ड) का गठन किया जाता है।”
संवत् २०८१, माघ कृष्ण चतुर्दशी | 28 जनवरी 2025
विराट एवं भव्य धर्मसभा — संयुक्त धर्मादेश
इसी क्रम में एक विराट एवं भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक सभा में सनातन के तीनों श्रेष्ठ शंकराचार्य विराजमान थे:
- ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज
- द्वारिका मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज
- श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री विधूशेखर भारती जी महाराज
इस परम् धर्म संसद के संयुक्त धर्मादेश में अनेक प्रस्ताव पारित हुए। इनमें संख्या नंबर-2 पर प्रस्ताव था कि—
प्रधानमंत्री को सनातन संरक्षण परिषद् गठन हेतु पत्र
तीनों शंकराचार्यों की उपस्थिति में आयोजित धर्म संसद में पारित धर्मादेश के पश्चात् सनातन धर्म की रक्षा एवं धर्मस्थलों के संरक्षण के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई।
इसी क्रम में बद्रिकाश्रम ज्योर्तिमठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने उत्साहित भाव से भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया।
इस पत्र में उनसे अनुरोध किया गया कि सनातन धर्म के प्रमुख मंदिरों एवं धर्मस्थलों की गरिमा, संरक्षण तथा सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए देशभर की मान्य सनातनी संस्थाओं और धर्माचार्यों के नेतृत्व में “सनातन संरक्षण परिषद् (सनातन बोर्ड)” का गठन किया जाए।
सनातन संरक्षण समिति का गठन
मोदी जी की तरफ से जब कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने “सनातन संरक्षण समिति” के गठन का निर्णय लिया।
अंततः इस समिति का गठन औपचारिक रूप से 26 दिसंबर, 2025 को हो गया।
सनातन संरक्षण समिति के गठन की आवश्यकता क्यों?
चिरकाल से देश के करोड़ों हिंदुओं को एक प्रभावशाली “धार्मिक हिंदू संगठन” का अभाव प्रतीत हो रहा था। वर्तमान में अधिकांश हिंदू भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हिंदुत्व का मुखौटा पहने, एक “तथाकथित हिंदू राजनीतिक दल” के रूप में देखते हैं जो पिछले 12 वर्षों में हिंदू जनमानस की अपेक्षाएं पूर्ण करने में विफल रही।
इसी प्रकार “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” को मात्र एक “सामाजिक हिंदू संगठन” के रूप में देखा जाता है, जो अब वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में असहाय तथा असमर्थ प्रतीत हो रहा है।
ऐसे में हिंदू समाज में आई उदासीनता, निर्बलता तथा अव्यवस्था की समस्या का समाधान कर, इसे पुनः संगठित, सुदृढ़ तथा सशक्त बनाने के लिए एक “धार्मिक हिंदू संगठन” का गठन करना, आज समाज की अनिवार्यता हो गई थी।
इसी अनिवार्यता की अनुभूति करते हुए ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के नेतृत्व में “सनातन संरक्षण समिति” का गठन किया गया। “सनातन संरक्षण परिषद” की औपचारिक घोषणा होने तक यह “समिति” एक “परिषद्” का पूरा दायित्व निभाएगी।







