उद्देश्य
सनातन संरक्षण समिति के मुख्य उद्देश्य
(क) मंदिर
- देश के सभी मन्दिरों एवं धर्मस्थलो का प्रबन्धन, नियन्त्रन एवं संचालन
- मन्दिरों में प्रवित्रता, स्वच्छता एवं विधि अनुसार प्रार्थना सुनिश्चित करना
- पुजारीयो की योग्यता को सुनिश्चित करना
- मन्दिरों के भवन एवं जमीन को सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान करना
तमिलनाडु के 11,999 से अधिक प्राचीन मंदिर आज उपेक्षा और संसाधनों के अभाव में अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
(ख) गौ सुरक्षा
- हर जिले एवं ग्राम स्तर तक गौशाला का प्रबन्धन करना, देश में लगभग 6 लाख गौशाला खोलने का लक्ष्य।
- स्वदेशी नसल की गायों को प्रोत्साहन देना
- गौ हत्या कानूनी अपराध बनाना तथा उसके प्रति कठोर दण्ड का प्रावधान करना
(ग) वैदिक शिक्षा-
- देश के पंचायत स्तर तक गुरुकुल की स्थापना सुनिश्चित करना एवं देश मै लगभग 6 लाख गुरुकुल खोलने का लक्ष्य।
- वैदिक शिक्षा के साथ, आधुनिक शिक्षा का ज्ञान भी देने का प्रावधान रखना।
- देश के हर स्कूल, कालेज तथा यूनिर्वसिटि मेवैदिक शिक्षा का प्राथमिक अध्ययन, एक अनिवार्य विषय बनाना।
- वैदिक शिक्षा के प्राथमिक अध्ययन पर आधारित एक सर्टिफिकेट कोर्स मे उत्तीर्ण होना, किसी भी सरकारी नौकरी के लिये अनिवार्य योग्यता बनाना।
- हर राज्य मे एक वैदिक बोर्ड का बनाना जो वहाँ के गुरुकुल तथा वैदिक सर्टीफिकेट कोर्स की परीक्षा का प्रबन्धन करे।
(घ) देश-विदेश के सनातन विचारधारा को प्रचार करना ।
“वसुदेव कुटुंबकम”तथा “सर्वे भवन्तु सुखिना”जैसे मूलभूत सिद्धांतो के आधार पर विश्व मे शान्ति लाना।
विश्वगुरु बनने और विश्व में शांति स्थापित करने का एकमात्र उपाय
(ङ) कुरीतियों का उन्मूलन
- युद्ध स्तर पर हिन्दू समाज में आयी अनेक कुरीतियो पर प्रहार करना तथा उनका उन्मूलन करना
(च) स्वदेशी उत्पाद
- स्वदेशी उत्पाद के उपभोग को प्रोत्साहित करना।
भारत को आत्मनिर्भर बनाने का मूलमंत्र - स्वदेशी अपनाएं
(छ) गौ-आधारित ग्रामीण अर्थव्ययवस्था विकसित करना
- जैविक खाद , जैविककृषि, घर घर मै गोबर गैस उपकरण, गौ आधारित औषधियाँ एवं चिकित्सा आदि को प्रोत्साहित करना।
(ज) पवित्रम प्रमाणिकरन
- पवित्रम प्रमाणिकरन(Pavitram Certification) को लागू करना, जिससे बाजारों में खाद्य प्रदार्थों एवं सेवाओ की शुद्धता सनातन के मापदंडों के आधार पर सुनिशचित की जा सकें।
(झ) नेतृत्व विकास प्रशिक्षण संस्थान
- सनातन धर्म की विचारधारा पर आधारित एक “नेतृत्व विकास प्रशिक्षण संस्थान” की स्थापना करना, जहाँ देश मे कर्तव्यनिष्ठ, सुशिक्षित, राष्ट्रवादी एवं निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले नेता प्रशिक्षित किये जाये जो हर क्षेत्र मे आजीवन त्याग एवं समर्पण के भाव से कार्य करें।
भारत को विश्व गुरु बनाने का यही मूल मंत्र है!
